क्या लिखूं यार? कुछ है ही नही लिखने को. दिमाग का दही होगया है यहाँ पड़े पड़े. आज तीन-चार घंटे के लिए अकेला भटक रहा था मैसूर में। बाई गोड कहाँ फँस गया मैं! कोई दिल्ली में नौकरी दिलवा दो यार प्लीज़। मन नही लग रहा यहाँ पर अब। एक महिना है अभी घर जाने में, जल्दी से ख़तम हो बस। एक हफ्ता ही सही, घर तो घर है।
Note: If you can't read this then don't worry. Nothing worth reading anyway. Later.
2 comments:
sid !!!! how can u be sooo vella !!!!!!!!!!!
vella? how do u mean?
Post a Comment